मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में अधिकारियों को दिए प्रभावी आपदा प्रबंधन के निर्देश
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को आईटी पार्क, देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में अधिकारियों को प्रभावी आपदा प्रबंधन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूर्व तैयारी, त्वरित निर्णय, बेहतर समन्वय तथा आधुनिक तकनीकों का समुचित उपयोग अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन योजना तथा राज्य के सभी 13 जनपदों की जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एसडीएमपी राज्य स्तर पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, पूर्व चेतावनी, राहत, बचाव, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण के लिए सभी विभागों की भूमिका, दायित्व एवं समन्वय व्यवस्था निर्धारित करती है। वहीं डीडीएमपी प्रत्येक जनपद की स्थानीय परिस्थितियों, संभावित आपदाओं, उपलब्ध संसाधनों एवं त्वरित कार्रवाई की विस्तृत कार्ययोजना उपलब्ध कराती है, जिससे आपदा की स्थिति में जिला प्रशासन प्रभावी एवं समन्वित ढंग से कार्य कर सके। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के अनुरूप तैयार की गई ये योजनाएं राज्य एवं जनपद स्तर पर बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक के उपयोग, प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली, समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन तथा त्वरित एवं सुनियोजित आपदा प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज सिद्ध होंगी।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ एवं अग्निशमन विभाग द्वारा लगाए गए आधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्हें उपकरणों के संचालन, उपयोगिता एवं आपदा के दौरान उनकी भूमिका की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रदर्शनी में विशेष रूप से एनडीआरएफ द्वारा सीबीआरएनई (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु एवं विस्फोटक) आपदाओं में उपयोग किए जाने वाले अत्याधुनिक उपकरण आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अतिरिक्त डीप डाइविंग सेट, नाइट विजन कैमरा, थर्मल इमेजिंग कैमरा, विभिन्न प्रकार के हाइड्रोलिक कटर, अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम, अंडरवाटर ड्रोन तथा सोनार सिस्टम सहित अनेक आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया गया।
एसईओसी से सवा घंटे तक की मॉक ड्रिल की निगरानी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र (एसईओसी) से करीब सवा घंटे तक राज्य स्तरीय मानसून मॉक ड्रिल की लाइव निगरानी की। इस दौरान उन्होंने सभी 13 जनपदों से क्रमवार जुड़कर विभिन्न आपदा परिदृश्यों, राहत एवं बचाव कार्यों तथा विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने विभिन्न जनपदों में तैनात इंसीडेंट कमांडरों से सीधे संवाद कर घटनास्थलों पर चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों, घायलों के उपचार की व्यवस्थाओं तथा स्टेजिंग एरिया में संसाधनों के प्रबंधन की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से यह भी जाना कि आपदा की सूचना प्राप्त होने के बाद किस प्रकार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। मुख्यमंत्री ने बागेश्वर में भारी वर्षा के बाद राहत एवं बचाव दलों की त्वरित प्रतिक्रिया, चम्पावत में शारदा नदी के उफान के दौरान चलाए गए रेस्क्यू अभियान तथा उत्तरकाशी के नेताला में संचालित राहत एवं बचाव कार्यों, नरकोटा में भूस्खलन तथा केदारनाथ पैदल मार्ग में मलबा आने के बाद उत्पन्न स्थित का एसईओसी से लाइव अवलोकन किया। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून के दौरान प्रत्येक परिस्थिति में त्वरित, समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए जन-धन की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए।
राज्य स्तरीय मानसून मॉक ड्रिल की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को जनसुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका उत्पन्न करने वाले सूखे एवं जर्जर पेड़ों की पहचान कर उन्हें समयबद्ध ढंग से हटाया जाए। उन्होंने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन को आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही, सभी सीवेज शोधन संयंत्रों (एसटीपी) का सुरक्षा अंकेक्षण कर उनकी संरचनात्मक एवं परिचालन सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से कहा कि वे जनप्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित करें तथा उन्हें आपदा प्रबंधन की तैयारियों एवं राहत कार्यों में सक्रिय रूप से सहभागी बनाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे आमजन के बीच जाकर संवाद स्थापित करें, उनकी समस्याओं को सुनें तथा आपदा से जुड़ी सूचनाओं एवं सावधानियों को समय पर साझा करें। उन्होंने नगर निकाय, पंचायत एवं तहसील स्तर पर जनसंवाद कार्यक्रम आयोजत करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जनविश्वास सर्वाेपरि हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आपदा के दौरान कार्य करते हुए हमारी नीति स्पष्ट और नीयत साफ होनी चाहिए।