पिटकुल प्रबंधन का कौशल ही है जो 1274 मीटर सरयू नदी की कठिन डगर हुई आसान

कुमाऊं क्षेत्र के हजारों बिजली उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज और ब्रेकडाउन से मिली राहत

चम्पावत (चंद्र प्रकाश बुडाकोटी)। पिटकुल की जिस परियोजना का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 अक्टूबर को किया उसे बना पाना आसान नहीं,  बल्कि सरयू नदी से पारेषण लाइन को लाना किसी चुनौती से कम नहीं था।  लेकिन राज्य के ऊर्जावान मुख्यमंत्री के कुशल मार्गदर्शन में पिटकुल एमडी के कुशल नेतृत्व और पिटकुल के योग्य इंजीनियरों की बदौलत ही आज 132 केवी की पिथौरागढ़, लोहाघाट, चम्पावत विद्युत पारेषण लाइन से कुमाऊं क्षेत्र के हजारों उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज की समस्या और ब्रेकडाउन से राहत मिल गई है।

 

पिटकुल के एमडी प्रकाश ध्यानी बताते है कि इस लाइन को बनाने मे पिटकुल को कुछ जगह बड़ी दिक्कते सामने आई जिसमे मुख्यतः सरयू नदी के ऊपर ग्राम निशनी एवं बडोनी मे नदी के 1274 मीटर के स्पान से टावर को लाना था। निर्माण कंपनी और अफसरों के साथ विशेष तकनीकी पर जोर देते हुए  इस स्थान पर स्पेशल टावर लगाए जाने पर सहमति बनी,  जिसमे सरकार का पूर्ण सहयोग मिला।  नदी पर दो स्पेशल टावर 98 एवं 99 के मध्य उत्तराखंड राज्य मे स्पेशल पेंचर कंडक्टर 1274 मीटर के सबसे लम्बे स्पान पर विशेष डिजाइन करते हुए उक्त कंडक्टर को एक टावर से दूसरे टावर तक जोड़ा गया। ध्यानी ने कहा कि यह पिटकुल की विशेष उपलब्धि भी है।

 

इस बारे में यूपीसीएल के निदेशक परिचालन एमएल प्रसाद का कहना है कि इस लाइन के चालू हो जाने से बड़ी राहत मिली है।  ट्रिपिंग की समस्या से निजात मिल गई है।  वही लोहाघाट चम्पावत के स्थानीय निवासी अनिल कुमार, सिवानी, अंजलि,उमेश, हरीश कहते है कि पहले कम वोल्टेज रहती थी जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिथौरागढ़, लोहाघाट, चम्पावत विद्युत पारेषण लाइन का लोकार्पण किया तब से विद्युत कटौती व लो वोल्टेज लगभग नगन्य हो गया है।

 

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