नई दिल्ली, 04 नवंबर (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय दिल्ली पुलिस के निलंबित एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली वकीलों की याचिका पर 6 नवंबर को सुनवाई करेगा।
बुधवार को वकीलों ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष मेंशन करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की, जिसके बाद न्यायालय ने 6 नवंबर को सुनवाई करने का आदेश दिया। तीन नवंबर को कुछ वकीलों ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष मेंशन करते हुए मनस्वी वशिष्ठ के आचरण पर स्वत: संज्ञान लेने की मांग की थी, लेकिन न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था।
उच्च न्यायालय ने वकीलों से कहा कि वे सभी उपलब्ध दस्तावेजों के साथ एक उचित याचिका दायर करें, जिस पर अदालत विचार करेगी। उसके बाद 3 नवंबर को ही उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई। वकीलों ने न्यायालय को बताया कि उनके खिलाफ “एके-47 का इस्तेमाल” और “काले कोट के गुंडे” जैसी टिप्पणियां की गईं।
दरअसल, दो नवंबर को ये पुलिसकर्मी पुलिस मुख्यालय के बाहर एकत्र होकर शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुई झड़प के बाद एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और इंस्पेक्टर अरुण कुमार को उनके पुराने पदों पर वापस तैनात करने की मांग कर रहे थे। यह विवाद तब शुरू हुआ था, जब एक बहस के दौरान वकील ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लग गई, जिसके बाद वकीलों ने पुलिस के बर्ताव पर सवाल उठाए थे। वकीलों ने आरोप लगाया कि एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने अपनी रिवॉल्वर दिखाकर उन्हें डराया-धमकाया।