
नई दिल्ली: जीएसटी में बदलाव के बाद कुछ चीजे सस्ती होंगी तो लग्जरी चीजों की कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता है। जीएसटी के नए स्लैब लागू होने के बाद हुक्का और सिगरेट पीने वालों को इसकी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। दरअसल, सरकार तंबाकू उत्पादों पर लगने वाले टैक्स को लेकर कुछ बदलाव करने की सोच रही है। खबर है कि सरकार जीएसटी की 40% दर के अलावा भी कुछ और टैक्स लगाने पर विचार कर रही है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि तंबाकू से होने वाली कमाई में कोई कमी न आए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी 2.0 सुधारों की घोषणा की है, जिसके तहत मुआवजा उपकर (compensation cess) को खत्म किया जाएगा। कई राज्य सरकार से यह मांग कर रहे हैं कि तंबाकू पर लगने वाले अतिरिक्त टैक्स में उन्हें भी एक बड़ा हिस्सा मिले। वे चाहते हैं कि जीएसटी से होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, सरकार सिन गुड्स यानी तंबाकू जैसे हानिकारक उत्पादों पर लगने वाले टैक्स पर विचार कर रही है। एक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चर्चा के दौरान कुछ राज्यों ने अतिरिक्त शुल्क में बराबर का हिस्सा मांगा है।
अभी तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों जैसे सिगरेट, सिगार, पान मसाला, हुक्का आदि पर 28% जीएसटी लगता है। इसके अलावा, इन पर मुआवजा उपकर, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क भी लगता है। इस तरह कुल मिलाकर 53% अप्रत्यक्ष कर लगता है। स्वतंत्रता दिवस पर वित्त अधिकारियों ने GST को दो स्तरों में बांटने का प्रस्ताव रखा था। इसमें 12% और 28% के स्लैब को खत्म करने और तंबाकू जैसे सिन गुड्स के लिए 40% की श्रेणी बनाने की बात कही गई थी। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि तंबाकू उत्पादों पर लगने वाला कुल टैक्स पहले जितना ही रहेगा। मुआवजा उपकर के बिना, इसके लिए अतिरिक्त शुल्क लगाने की जरूरत होगी।
बता दें कि फिलहाल जीएसटी की 4 लेवल दर स्ट्रक्चर है। मौजूदा व्यवस्था के तहत 5%, 12%, 18% और 28% की दर से जीएसीटी लगता है। फूड सामानों 0% या 5% टैक्स स्लैब में आते हैं। जबकि लक्जरी और सिगरेट, लिकर जैसे सिन गुड्स पर 28% टैक्स लगता है। 28% स्लैब के ऊपर इन हानिकारक और लग्जरी वस्तुओं पर अलग-अलग दरों से सेस भी लगाया जाता है।
