निगम कर्मियों का अपने ही अधिशासी अभियंता के खिलाफ धरना, प्रबंधन के ढुलमुल रवैये से सरकार की साख पर बट्टा

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रानीखेत/देहरादून।  आज  निर्माण शाखा उत्तराखण्ड पेयजल निगम रानीखेत के अभियन्ताओं द्वारा अधिशासी अभियन्ता समीर प्रताप सिंह के खिलाफ चल रहे असहयोग आन्दोलन / कार्यबहिष्कार द्वितीय दिवस में भी चालू रहा। उपस्थित पीड़ित अभियन्ताओं द्वारा जमकर नारेबाजी की गयी एवं जल निगम प्रशासन की हीलाहवाली को लेकर रोष व्यक्त किया गया उपस्थित वक्ताओं द्वारा अधिशासी अभियन्ता के द्वारा वेतन निर्गत करने में की जा रही मनमानी की आलोचना की गयी एवं बताया गया कि वर्तमान तक भी सहायक अभियन्ता का जनवरी माह का वेतन निर्गत नहीं किया गया है, जिसके कारण सहायक अभियन्ता के परिवार को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

 

अभियन्ताओं के असहयोग आन्दोलन के कारण जल जीवन मिशन जैसे महत्वपूर्ण परियोजना के कार्य भी प्रभावित रहे उपस्थित कार्मिकों ने बताया कि आन्दोलन नोटिस के उपरान्त अधिशासी अभियन्ता द्वारा द्वेष भावना एवं मलिन मानसिकता से ग्रसित होकर सहायक अभियन्ता / अपर सहायक अभियन्ता / कनिष्ठ अभियन्ता को पत्रों का प्रेषण किया जा रहा है जिस पर वहाँ उपस्थित उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियरिंग संघ के समस्त सदस्यों द्वारा नाराजगी व्यक्त की गयी.

 

कार्यबहिष्कार / आन्दोलन में  दीपक टम्टा,  अंकित कुमार,  विवेक पाठक,  सौरभ चौहान,  अरविन्द सिंह, पंकज सिंह जीना,  सुभम बेलवाल,  उज्जवल नौटियाल ,  विवेक पाठक ,  विपिन तोमर  शंशाक कोठारी,  जया जोशी   लता दुर्गापाल, अरूण कठैत, पंकज कुमार आर्या,  एम०एन० जोशी , निरंकार तिवारी, जे०एस० तोमर, परवेज जहाँ,  अरविन्द सिंह नेगी,  मोहिन्द्र बिष्ट,  सुनील कबडवाल, दीपक जोशी,  अंकित कुमार   अर्जुन सिंह ,  नवीन उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।

 

गौरतलब है कि पेयजल निगम के कई कर्मचारी ऐंसी ही मनमर्जी या धींगामुश्ती के कारण अक्सर  चर्चाओं में रहते है, जिसका राज्य के  विकास पर प्रतिकूल असर होता है , कार्मिकों की इस तरह की कार्य प्रणाली उत्तराखंड सरकार के द्वारा किये जा रहे जनहित के कार्यों को भी लंबित रखती  है।  जिस राज्य के मुख्यमंत्री की विकास के प्रति बेहतरीन सोच हो व देश के प्रधानमंत्री ने जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं पर विशेष फोकस किया हो , उन योजनाओं को उत्तराखंड पेयजल निगम प्रबंधन व इनके कार्मिकों द्वारा पलीता लगाया जा रहा है जिस कारण सरकार की छवि धूमिल हो रही है ।

 इस तरह की अनुशासहीनता पर निगम के प्रबंधन को अंकुश लगाना चाहिए साथ ही संघ द्वारा अपने अधिशासी अभियंता पर लगाए गए आरोपों की जांच करनी चाहिए जिससे जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं को पारदर्शिता के साथ पूर्ण किया जा सके। 

 

इस विषय पर अधिशासी अभियंता के पक्ष जानने की कोशिस की गयी लेकिन उनसे सम्पर्क नहीं हो पाया , अधिशासी अभियन्ता, निर्माण शाखा, रानीखेत का पक्ष मिलने पर हमे उसे भी प्रकशित करेंगे। 

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